अंतिम अद्यतन : 01/03/2019
राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान
कला इतिहास, संरक्षण एवं संग्रहालय विज्ञान
(विश्वविद्यालयवत्)
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
 
 
 
 
 
पूरक परीक्षा
 

पृष्ठभूमि:

यह देखा गया है कि एनएमआई के कुछ स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के छात्र किसी न किसी बहाने से मुख्य सेमेस्टर परीक्षाओं में उपस्थित नहीं होते हैं तथा बाद में पूरक परीक्षाओं में उपस्थिति होना चाहते हैं। इससे एनएमआई के सामान्य शिक्षण और परीक्षा प्रणाली में बाधा आती है। इस दृष्टि से और अपनी मर्जी से तथा तथ्यहीन आधार पर पूरक परीक्षाओं में उपस्थित होने की आदत को रोकने के लिए निम्नलिखित दिशा निर्देशों को तत्काल प्रभाव से कार्यान्वित करने का प्रस्ताव है:

पूरक परीक्षा के लिए पात्रता:

  1. कोई छात्र किसी पेपर की थ्योरी अथवा प्रैक्टिकल परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्ण अंक प्राप्त करने में असमर्थ रहता है अथवा किसी थ्योरी अथवा प्रैक्टिकल परीक्षा में किसी आधार पर, जिसमें चिकित्सीय आधार भी शामिल है, उपस्थित होने के लिए उस विशेष पेपर में पूरक परीक्षा देने के लिए पात्र होगा।
  2. वे छात्र, जिन्हें थ्योरी अथवा प्रैक्टिकल में उपस्थिति कम होने के कारण परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया है, भी इस शर्त के अध्यधीन पूरक परीक्षा में उपस्थित रहने के पात्र होंगे, कि जब कभी संस्थान द्वारा कक्षाएं होंगी उन्हें उस विशेष पेपर की कक्षा में उपस्थित होना होगा।
  3. प्रथम सेमेस्टर के छात्र, जो फाउंडेशन पाठ्यक्रम के सभी पेपरों में उपस्थित नहीं हुए थे, पूरक परीक्षा में बैठने के पात्र नहीं होंगे तथा उनका दाखिला रद्द कर दिया जाएगा।

नियम

  1. यदि किसी छात्र को कम उपस्थिति होने के कारण परीक्षा में बैठने से रोक दिया जाता है तो उसे जब संस्थान द्वारा उक्त पेपर की कक्षाएं होंगी, उनमें उपस्थित होना होगा ताकि पूरक परीक्षा में बैठने के लिए पात्र हो सकें।
  2. पूरक परीक्षा एक वर्ष बाद ही दी जा सकेगी जब वही सेमेस्टर पेपर पुनः होगा। उदाहरणार्थ, पहली सेमेस्टर पूरक परीक्षा अगले वर्ष (वर्षों) की पहली समेस्टर परीक्षा के साथ ही होगी अर्थात् तीसरे/पांचवें सेमेस्टर में होगी न कि दूसरे और चौथे सेमेस्टर परीक्षा के साथ होगी।
  3. यदि कोई छात्र पूरक परीक्षा में बैठना चाहता है तो उसे चल रहे मौजूदा सिलेबस के अनुसार परीक्षा देनी होगी। उदाहरण के लिए, यदि 2004 बैच का छात्र 2005 में पूरक परीक्षा देना चाहता है तो उसे 2005 के सिलेबस के अनुसार परीक्षा देनी होगी। यदि सिलेबस में कुछ जोड़ा गया है जो उस छात्र ने नहीं पढ़ा है, तो उस छात्र को उस पेपर के लिए जूनियर बैच (बैचों) की होने वाली कक्षाओं में उपस्थित होना होगा अन्यथा उस छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
  4. यदि कोई छात्र किसी विशेष थ्योरी परीक्षा में बैठना चाहता है तो उक्त पेपर की प्रक्टिकल परीक्षा में भी अनिवार्य रूप से बैठना होगा और यदि पै्रक्टिकल परीक्षा में बैठना चाहता है तो थ्योरी परीक्षा में भी बैठना अनिवार्य है और सारे अपेक्षित नियत कार्य फिर से पूरे करने होंगे। इसका अर्थ है कि थ्योरी और प्रैक्टिकल  दोनों परीक्षाओं को साथ-साथ उत्तीर्ण करना पडे़गा न कि अलग अलग रूप से उतीर्ण करना होगा। इसलिए कोई छात्र यदि किसी पेपर में केवल थ्योरी अथवा प्रैक्टिकल परीक्षा में उत्तीर्ण होता है तो उसे दोनों में पूरक परीक्षा देनी होगी।
  5. किसी छात्र को लगातार पूरक परीक्षा में बैठने के केवल दो ही अवसर मिलते हैं (अधिकतम दो वर्ष) यदि कोई छात्र इस निर्धारित अवधि में परीक्षा उत्तीर्ण करने में असमर्थ रहता है, तो उसे अनुत्तीर्ण समझा जाएगा और आगे कोई अवसर नहीं दिया जाएगा।
  6. किसी छात्र को एक पूरक परीक्षा के लिए प्रति पेपर 250 रूपये फीस जमा करानी होगी। यह फीस सेमेस्टर के आरम्भ होने के पंद्रह दिनों के अन्दर जमा करानी होगी। इसके पश्चात पूरक परीक्षाओं के किसी अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा।
  7. किसी छात्र द्वारा उत्तीर्ण की गई परीक्षाओं को सेमेस्टर में तथा उस छात्र की अन्तिम अंक तालिका में “पूरक परीक्षा“ के रूप में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा। ऐसे छात्र योग्यता के आधार पर, संस्थान द्वारा प्रदान की जाने वाली किसी प्रकार की छात्रवृत्ति/मैडल/सम्मान पाने के पात्र नहीं होंगे।
   
 
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