अंतिम अद्यतन : 01/03/2019
राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान
कला इतिहास, संरक्षण एवं संग्रहालय विज्ञान
(विश्वविद्यालयवत्)
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
 
 
 
 
 
परीक्षा: उत्तर पुस्तिका का पुनः मूल्यांकन
 

उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन से सम्बन्धित दिशा निर्देश

  1. यदि किसी परीक्षार्थी को किसी विषय अथवा विषयों में संदेह है, अथवा किसी थ्योरी पेपर अथवा पेपरों प्राप्तांकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन, के लिए आवेदन कर सकता/सकती है प्रैक्टिकलन, मौखिक परीक्षा, फील्ड कार्य, शोध निबंध और सेमिनार पर यह खंड लागू नहीं होगा।
  2. प्रत्येक उत्तर पुस्तिका के पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रत्येक आवदेन के साथ 100 रूपये का शुल्क, परीक्षा परिणाम घोषित होने से एक महीने के अंदर कुलसचिव, राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान के पास पहुँच जाना चाहिए।
  3. पुनर्मूल्यांकन के लिए आवदेन प्राप्त होने की तारीख से 10 दिनों के अंदर, संबंधित विषय के दो बाह्य परीक्षक, उसके अलावा जिसने आरम्भ में मूल्यांकन किया था, कुलपति द्वारा नियुक्त किए जाएं और उन निरीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाएं भेज दी जांएगी तथा यह निर्देश दिया जाएगा कि वे पुनर्मूल्यांकन के पश्चात इन उत्तर पुस्तिकाओं को पंद्रह दिनों के अंदर वापस कर दें।
  4. दोनों परीक्षकों, जिन्हें उत्तर पुस्तिका भेजी गई थीं, के द्वारा दिए गए अंकों को उनके द्वारा दो अलग-अलग पत्रकों (अनुक्रमांक सूची) में लिखा जाएगा और संस्थान के कार्यालय में दोनों परीक्षाओं द्वारा दिए गए अंकों का औसत निकाला जाएगा। इस प्रकार निकाले गए अंकों को संशोधित अंक समझा जाएगा।
  5. यदि पुनर्मूल्यांकन के पश्चात अंक पेपर में पहले दिए गए पूरे अंकों से 10 प्रतिशत से अधिक हैं, तो अभ्यर्थी द्वारा जमा किया गया पुनर्मूल्यांकन शुल्क वापस कर दिया जाएगा।
  6. पुनर्मूल्यांकन के लिए परीक्षार्थी विशेष की उत्तर पुस्तिका के साथ, उसी विषय और पेपर की अन्य परीक्षार्थियों की चार और उत्तर पुस्तिकाएं भी दोनों नए नियुक्त किए गए परीक्षकों को इस अनुरोध के साथ भेजी जाएंगी कि पिछले परीक्षकों के पुनर्मूल्यांकन के मानक को अपनाया जाए। चार उत्तर पुस्तिकाओं के चयन में, दो उत्तर पुस्तिकाएं उन परीक्षार्थियों की होनी चाहिए जिनके रोल नम्बर सम्बन्धित परीक्षार्थी के रोल नम्बर से क्रमशः पहले हों और दो उत्तर पुस्तिकाएं संबंधित परीक्षार्थी के रोल नम्बर के बाद के परीक्षार्थी की हों।
  7. यदि उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन के कारण परीक्षा के परिणाम में कोई अंतर आता है, तो कोई परीक्षार्थी किसी कानूनी न्यायालय में न तो शिकायत कर सकता है और न ही सम्बन्धित परीक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई की जा सकती है।
  8. पुनमूल्र्यांकन के लिए नियुक्त परीक्षकों को निर्धारित पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा।
  9. उपर्युक्त खंड में कहीं भी उल्लिखित किसी बात के बावजूद, कुलपति अपने विचार से, किसी पेपर (पेपरों) के किसी परीक्षार्थी (परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं को, जिनका पुनः मूल्यांकन किया गया है, को अकादमिक स्तर को बनाए रखने के लिए और ऐसी किसी कार्रवाई के लिए अपने पास मंगा सकते हैं।
   
  टिप्पणी: ऐसे मामले में, पहले दिए गए अंकों में वृद्धि अथवा कमी दोनों होने की संभावना होगी, परन्तु संशोधित दिए गए अंकों के खिलाफ कोई अपील नहीं की जा सकती।
   
 
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